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भोजपुरी में पढ़ें – कोरोना का बिगाड़ ली चट्टी के चाय के?

कोरोना काल में सबसे ज्यादा चाय पर बैठकी के याद आवत बा.

कोरोना काल में सबसे ज्यादा चाय पर बैठकी के याद आवत बा.

दिन भरि में कई हाली ऑफिस से बहरा निकलि के चुस्की-सुट्टा वाला लोगन के आराम हो गईल बा. आखिर चट्टिए पर आइके त ऑफिस-घर के बात होला. अब बॉस के चुगली करे के बा त ई काम ऑफिस में त होई . बहरा आवहीं के बा.

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  • Last Updated: November 20, 2020, 3:29 PM IST
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अपना देश में चट्टी पर चाय पीयत लोग चारों ओरि लउके ला. शहरी लोग चट्टी के दोकानि के ‘टपरी’ कहे ला. बुझाता कि शहर में टपरी मारे के काम भी देहात के चट्टीबाजी नियर होला. गांव में अब खेती किसानी में लागल लोग भी सांझी के बेरा चट्टी पर जाके भरूका (कुल्हड़) में चाय के माजा लेत बा. शहरन में त पहिलवे से ऑफिस अऊर कारखनन में काम करे वाला लोग कई हाली बहरा निकलि के चाय के चुस्की अऊर सिगरेट के सुट्टा मारे ला. सवाल ई बा कि कोरोना महामारी के बाद चट्टीबाजी मतलब टपरिहा करे वाला लोग के का हालि बा. साफे लागत बा कि गांव-देहात त कबो कोरोना से ना डेराइल रहल हा. एसे गांव के चट्टी कोरोना के चरचा के संगे हरदम आबादे रहलि हा. बात शहरन के बा, त जानात बा कि तनकी से झटका के बाद ओहू जगहि जाड़ा शुरू होखते फेरू से चुस्की अऊर सुट्टा शुरू हो गईल बा. सांच पूछीं त सुटवा त कबो बंद ना भईल रहल हा, चट्टी के चाय जरूर बंद हो गईल रहल हा.

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बीच में चाय के दुकान चल गइल रहली स

कोरोना के असर तनी कम होते शहर के टपरी चले लगली सन. एकरा में कवनो मुश्किलो ना रहल हा. जहां गिलास चलत रहल हा, अब ओइजा डिस्पोज़ेबल कप अऊरी चुक्का (कुल्हड़) चले लागल बा. जनधन योजना में पहिलहीं गरीब-गुरबा के बैंक एकाउंट खुलि गईल रहल हा. अब डिजिटल पेमेंट के उपाइ भी निकल गइल बा. से चाय वाला दुकानदार भी कई कई गो तख्ती लगा के ओह पर बनल क्यूआर के स्केन कइ के पइसा देबे के कहत बाड़े. हं, ई दिक्कति जरूर भईल बा कि कर्जा उठाइके काम करे वाला बहुते दुकानदार अपना घरे गईले त लौटल नईखन. बाकिर जे लवटि आईल बा, ओकरा के सरकारी कर्जा भी मिलत बा. केंद्र के शहरी अऊर आवास मंत्रालय एह लोगन के 10 हजार रुपया तक के कर्जा देत बा. एसे दोकानदार लोगनि के तनी राहत मिलल बा. बतावल जाला कि अइसन दोकानदार प्राइवेट लोगनि से 100 पर एक रुपया रोजना के दर से कर्जा लेके काम करे ला. अब जेकरा के सरकारी कर्जा मिलि जाई, ओकरा के आराम त रहबे करी.चाय प बतकही

चट्टी-टपरी के कामो भी त उधारी के होला. बहुते बाबू लोग महीना भरी चाय पियला के बाद तनख्वाह मिलला पर पईसा देला. दोकनदार लोग फेरु से हिम्मत कईले बा. एसे दिन भरि में कई हाली ऑफिस से बहरा निकलि के चुस्की-सुट्टा वाला लोगन के आराम हो गईल बा. आखिर चट्टिए पर आइके त ऑफिस-घर के बात होला. अब बॉस के चुगली करे के बा त ई काम ऑफिस में त होई . बहरा आवहीं के बा. ई जरूर बा कि कोरोनवा के कारन तनी सावधानी बा. लोग मॉस्क लगाके आवत बा. इ मानि के कि चहवा त गरमे बा, कोरोना के असरि ना होई, थोरे देरि मॉस्क हटा के चाय के मजा लिहल जात बा. लोग सिगरेट के सुट्टा मारत बा. एही बीचे बातचीच चलत बा अऊर एकरे संगे चट्टी आबाद हो गईल बाड़ी सन.
वर्क फ्रॉम होम के दर्द

ई जरूर भईल बा कि अबही कई गो ऑफिस वर्क फ्रॉम होम के हालति में बाड़े सन. एसे चट्टी के चाय पीए खातिर पहिले से लोग कम हो गईल बा. तबो फेरु से शुरुआत हो गईल बा. उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान ओऊरी उड़ीसा से रेहड़ी- टपरी चलावे वाला लोग बड़ शहरन में लौटे लागल बा. देश के राजधानी अऊर अगल-बगल नोएडा-गुरुग्राम जइसन शहरन में ई देखाए लागल बा. आखिर ए देस के जीवन में चट्टी-टपरी रोज के काम में समाइल बा. एकरा के कब तक टालल जा सकेला?

Source From : News18

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