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अमेरिका से इंजीनियरिंग कर प्रचारक बने विहिप राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बालकृष्ण नाईक का निधन

नई दिल्ली, 19 नवंबर (आईएएनएस)। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक रहे बालकृष्ण नाईक के निधन पर संघ परिवार से जुड़े संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई। 78 वर्षीय बालकृष्ण नाईक ने महात्मा बुद्ध के महा-निर्वाण स्थल कुशीनगर में बुधवार की रात्रि 11.30 बजे अंतिम सांस ली। बालकृष्ण नाईक का अंतिम संस्कार उनके गृहनगर महाराष्ट्र के औरंगाबाद में शुक्रवार को किया जाएगा।

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने आईएएनएस को बताया कि अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग के बाद बालकृष्ण नाईक संघ के प्रचारक बने। वह 1974 में विहिप में विश्व हिंदू परिषद से जुड़े। उन्होंने जीवन के 23 वर्ष कम्युनिस्ट शासित बंगाल में लगाए। उन्होंने सभी मतों के संतों को एकजुट करने की पहल की। इसके लिए बने समन्वय मंच के वह 15 वर्षों तक प्रमुख रहे। विहिप के संयुक्त महामंत्री व केद्रीय उपाध्यक्ष रहे।

78 वर्षीय बालकृष्ण नाईक शांत, प्रसन्नचित, विनम्र व मृदुभाषी होने के साथ विपश्यना साधना के साधक थे। जैन सिख बौद्ध सनातनी आर्य समाजी, कबीर पंथी आदि विश्व भर में फैले भारतीय मूल के सभी मतों के संतों से उनका सीधा संपर्क था। विनोद बंसल ने बताया कि बालकृष्ण नाइक का अंतिम संस्कार शुक्रवार को उनके गृहनगर औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में किया जाएगा। अनेक वर्षों से अस्थमा से लड़ते हुए भी वे निरन्तर प्रवास कर देश विदेश में हिंदुत्व का प्रवाह बढाते रहे।

विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने बताया कि नाईक ने महात्मा बुद्ध की पवित्र महानिर्वाण भूमि कुशीनगर में ही देह त्याग की इच्छा जताई थी। उन्होंने सुबह ही भगवान बुद्ध के उस विश्व प्रसिद्ध महापरिनिर्वाण मन्दिर में दर्शन पूजन भी किया। सायंकाल अचानक स्वास्थ्य बिगड़ा और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

एनएनएम-एसकेपी

Source From : Bhaskar Hindi

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