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राजद नेता सह पूर्व लोकसभा प्रत्याशी ने किया जनसभा को संबोधित। नीतीश-मोदी पर बोला हमला

आरजेडी नेता और झंझारपुर लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी विपिन कुमार सिंघवायत ने शुक्रवार को खुटौना में एक जनसभा को संबोधित किया। श्री सिंघवायत ने नीतीश  सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य,  रोज़गार, पलायन, भ्रष्टाचार, अपराध, बाढ़, महंगाई  हर मानक में हर राज्य से पीछे, फिर भी सुशासन? 15 साल के तथाकथित सुशासन और डबल इंजन वाली सरकार के बाद अब तो और भी फ़िसड्डी राज्य हो गया है। बिहार की 60 फ़ीसदी आबादी युवा है। अब बिहार को रूढ़िवादी नहीं बल्कि उनके सपनों और आकांक्षाओं से क़दमताल करने वाली नयी सरकार की ज़रूरत है।

जनसभा को संबोधित करते हुए लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी व राजद के नेता विपिन कुमार सिंघवाइत

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जनसभा में मोदी-नीतीश सरकार पर जमकर बरसे बिपिन कुमार सिंघवाइत

स्वास्थ्य सेवा के सरकारी दावों के खुल रही है पोल

बिपिन कुमार सिंघवाइत  ने आरोप लगाया कि बिहार में स्वास्थ्य सेवा अंतिम सांस गिन रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों के लिए हालात बदतर हैं। उन्होंने कहा कि कोविड केंद्रों में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों के पास पहनने के लिए पीपीई किट नहीं है। कोरोना के आंकड़ों को लेकर सरकार पर हमला किया है। क्या कोरोना संक्रमण पर अब भी कुछ बोलने की आवश्यकता है? जिस प्रकार नीतीश जी का ‘कानून अपना काम कर रहा’ है उसी प्रकार ‘कोरोना भी अपना काम कर रहा’ है। सरकार आंकड़ो की हेरा-फेरी में मस्त है’।

गौरतलब है कि, बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।  बिहार स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में अब कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या 17728 है। अब तक कुल 1,12,445 मरीज ठीक हो चुके हैं। राज्य में कोरोना मरीजों की रिकवरी की दर 85.94 फीसदी है। बिहार में हर साल हजारों लोग उचित स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ देते हैं। साल 2019 में नीति आयोग द्वारा राज्यों का स्वास्थ्य सूचकांक जारी किया गया था, इसमें बड़े राज्यों में बिहार सबसे निचले पायदान पर रहा था।

बीते सालों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहे सुधारों को लेकर कई दावे कर चुके हैं  लेकिन कोरोना संक्रमण के दौर में भी राज्य से बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की खबरें लगातार आ रही हैं।

कभी शिक्षा का केंद्र बिंदु था बिहार, आज बदहाल’

बिपिन सिंह सिंघवाइत ने शिक्षा एवं  रोजगार जैसे मुद्दों पर नीतीश सरकार पर जमकर निशाना साधा। नीतीश कुमार पर शिक्षा व्यवस्था को खंडहर में तब्दील करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों में मीठा जहर देकर बिहार की शिक्षा व्यवस्था का निर्ममता से कत्ल किया गया है। उन्होंने दिल की बात करते हुए कहा था कि ‘हमारा बिहार, वही बिहार जो कभी शिक्षा का केंद्र बिंदु था आज बदहाल है। बिहार बेरोजगारी का केंद्र बिंदु बन चुका है। 45 वर्षों बाद देश में बेरोजगारी सबसे अधिक है। पूरे देश में बिहार की बेरोजगारी दर तेज़ी से बढ़ रहा है। बिहार के युवा प्रतिभावान होने के बावजूद दूसरे प्रदेशों में मामूली मेहनताने पर छोटे-मोटे काम करने को विवश हैं।’ उन्होंने   बताया कि , ‘नीतीश जी ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाप्त कर, इन्हें खंडहर में तब्दील कर, दो पीढि़यों का अपूर्णीय नुकसान किया है। दो पीढ़ियों के भविष्य को बर्बाद कर उनके जीवन को अंधेरे कुएं में धकेलने वाले मुख्यमंत्री को इस आपराधिक कृत्य के लिए छात्र और युवा माफ नहीं करेंगे।’

आरक्षण खत्म करने की बात करने वाले जातिवाद खत्म क्यों नहीं करते?

जातिवाद एवं आरक्षण के मुद्दे पर तीखा हमला करते हुए बिपिन कुमार सिंघवाइत ने भी भारतीय जनता पार्टी  सरकार पर निशाना साधा है। बिहार जैसे पिछड़े और सामंती मूल्यों वाले राज्य में पहली बार कोई नेता सामंतवादियों को उसकी भाषा में जवाब दे रहा था।  वे सवर्णों के सांस्कृतिक और राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती दे रहे थे। साजिश के तहत उन्हें आवाज़ को दबाया गया। लालू यादव ने वंचित जनता को स्वर्ग नहीं, लेकिन स्वर ज़रूर दिया।  उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि  “आरक्षण खत्म करने की बात करने वाले जातियां खत्म करने की बात क्यों नहीं करते? इसलिए कि जातियां उन्हें श्रेष्ठ बनाती हैं, ऊंचा स्थान देकर बेवजह उन्हें स्वयं पर अहंकार करने का अवसर देती है। हम कहते हैं पहले बीमारी खत्म करो लेकिन वो कहते हैं नहीं पहले इलाज खत्म करो । “

मोदी सरकार पर निशाना, पूछा, काला धन पर चुप क्यों हैं पीएम, धन जमा करने वाले करीबी तो नहीं?

श्री विपिन कुमार सिंघवायत ने काला धन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है। काले धन को वापस लाने को लेकर मोदी सरकार ने बड़े-बड़े वादे तो कर दिये लेकिन अगर बात उन पर अमल करने की आई तो यहां भी मोदी सरकार नाकाम ही नजर आ रही हैं।  पीएम मोदी ने ये तो कहा की न खाऊगां न खाने दूगां । लेकिन अब सवाल ये उठता है की जब अपने किसी को खाने ही नही दिया तो आखिर स्विस बैंक में जमा काले धन पर 50 फीसदी का इजाफा कैसे हुआ ।  उन्होंने कहा कि देश यह जानना चाहता है कि पीएम मोदी काला धन के मुद्दे पर चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कही यह वजह तो नहीं है कि जितने लोगों का विदेशों में धन जमा है, वह बीजेपी के करीबी हैं। उन्होंने कहा कि आखिर क्या वजह है कि इतने कम समय में बीजेपी सबसे अमीर पार्टी बन गई। बिपिन सिंह सिंघवाइत ने नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या जैसे व्यवसायियों का हवाला देते हुए कहा कि देश में व्यवसायी अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए बैंकों की मदद लेते हैं और फिर उनका पैसा खाकर भाग जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग यह सोच रहे हैं कि मोदी सरकार ऐसे व्यवसायियों को फरार होने से रोकने में नाकाम क्यों है।

प्रवासी श्रमिकों को लेकर नीतीश सरकार पर हमला, 

RJD का नीतीश सरकार पर हमला आरजेडी ने प्रवासी श्रमिकों को लेकर नीतीश कुमार (Nitish Kumar)सरकार पर निशाना साधा है ।  बिपिन कुमार  सिंघवायत ने कहा है कि, सरकार दो तरह के नियम के तहत काम कर रही है। बड़े लोगों को प्लेन से बुला रही है सरकार और श्रमिकों को पैदल घर जाने के लिए छोड़ दिया गया। दरअसल, कोरोना काल में जब प्रवासी श्रमिकों से लेकर तमाम तरह की परेशानियों से सरकार जूझ रही थी , तब विपक्ष ने भी उसके खिलाफ तल्ख़ तेवर अपनाया था।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार पर सरकार चुप क्यों

बिपिन कुमार सिंघवाइत  का कहना है कि आज समाज में नफरत और हिंसा की मानसिकता की भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है। महिलाओं और बच्चियों से दुष्कर्म की वारदात हो रही है और सरकार मौन है। अपराधियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।  उन्होंने कहा कि पहला मुद्दा तो कानून-व्यवस्था की हालत है। सरकार को इसे सही करना चाहिए। इससे सरकार और प्रशासन पर लोगों का भरोसा मजबूत होगा।  दूसरा मुद्दा भ्रष्टाचार है। आज बीडीओ, सीओ के कार्यालय या थाने जाने में लोग डरते हैं। लोगों में यह धारणा बन गयी है कि यहां जाने पर लेनदेन के बिना कोइ काम नहीं होगा। सरकार को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। तीसरा मुद्दा महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा है। हाल के दिनों में महिलाओं पर अत्याचार बढ़े है। लोगों को अपनी बेटियों की चिंता सताने लगी है। कई जगहों पर शाम होते ही महिलाओं के बाहर निकलने पर रोक लगा दी जाती है।

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